अनुलोम विलोम के फायदे और नुकसान | Anulom Vilom ke fayde aur nuksan hindi mei

अनुलोम विलोम के फायदे और नुकसान | Anulom Vilom ke fayde aur nuksan hindi mei

अनुलोम विलोम के फायदे और नुकसान | Anulom Vilom ke fayde aur nuksan hindi mei

अनुलोम विलोम एक तरह का प्राणायाम है। जिसमें अनुलोम का मतलब है सीधा और विलोम का मतलब है उल्टा। यह प्राणायाम नाक के द्वारा किया जाता है, इसलिए यहां पर अनुलोम यानी सीधे का मतलब है नाक का सीधा यानी दाहिनी तरफ का हिस्सा और विलोम यानी उल्टे का मतलब है नाक का उल्टा यानी बाहिनी तरफ का हिस्सा। तो पाठकों, आज के इस लेख में हम जानेंगे कि अनुलोम विलोम करने के क्या-क्या फायदे और नुकसान होते हैं। जी हां, प्राणायाम ठीक तरीके से ना करने से इसके नुकसान भी हो सकते हैं।

अनुलोम विलोम प्राणायाम को नाड़ी शोधक प्राणायाम भी कहा जाता है क्योंकि नियमित रूप से इस प्राणायाम को करने से नाड़ी अर्थात नसों की सफाई होती है और यह रोग मुक्त बनती है। इस प्राणायाम को करने का तरीका यह है कि दाहिने हाथ के अंगूठे से नाक के दाहिने छिद्र को बंद करें और बाहिने छिद्र से धीरे-धीरे सांस अंदर ले, अब बाई तरफ के छिद्र को अंगूठे के साथ वाली दो उंगलियों से बंद करें और तुरंत ही दाहिने छिद्र से अंगूठा हटा ले और दाहिने छिद्र से धीरे-धीरे सांस को छोड़ें। ऐसा 5 से 10 मिनट तक करें।

अनुलोम विलोम को किसी भी मुद्रा में बैठकर किया जा सकता है, लेकिन इसे लेट कर नहीं किया जा सकता। अनुलोम विलोम को खाली पेट करना चाहिए। इसलिए इस प्राणायाम को करने का सबसे सही वक्त होता है सुबह का समय। इसी के साथ सुबह सुबह के वक्त हवा भी ताजी होती है। इसलिए अनुलोम विलोम को सुबह करने से सबसे ज्यादा फायदे होते हैं।

हम दिन में या रात में भी अनुलोम विलोम कर सकते हैं। लेकिन इसकी यही शर्त है कि हमारा पेट खाली हो, आपने 3 या 4 घंटे से कुछ भी ना खाया हो। इसके साथ ही इस दौरान हम पानी पी सकते हैं। अनुलोम विलोम करने के आधे घंटे बाद तक भी हमें कुछ नहीं खाना चाहिए।

अनुलोम विलोम करने से पूरे शरीर में ब्लड सरकुलेशन अच्छे से होता है। इसके साथ ही यह गैस और कफ से संबंधित बीमारियों को भी ठीक करने में सहायक होता है। यह श्वास नली को साफ रखने में भी मदद करता है। नियमित रूप से अनुलोम विलोम का अभ्यास करने से फेफड़े मजबूत होते हैं। गठिया जैसी समस्या में भी अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से राहत मिल सकती है क्यूंकि इसके अभ्यास से नसों में रक्त प्रवाह अच्छे से होता है, और इसी वजह से डाइजेशन सिस्टम भी अच्छा होता है।

मानसिक तनाव की स्थिति में अनुलोम विलोम का अभ्यास करने से काफी हद तक राहत मिलती है क्योंकि इसे करने से हमारे शरीर और दिमाग में ऑक्सीजन का संचार अच्छी तरह से होता है। इसके साथ ही अनुलोम विलोम करने से ध्यान केंद्रित करने जैसी प्रक्रिया भी साथ-साथ हो जाती है, जिससे हमारा कंसंट्रेशन बढ़ता है। माइग्रेन की समस्या में अनुलोम विलोम करने से सर दर्द की परेशानी कम होती है। ब्लड प्रेशर के संतुलन के लिए भी अनुलोम-विलोम एक बहुत अच्छी क्रिया है।

अनुलोम विलोम करने से कोई नुकसान नहीं होता है, जब तक हम उसे सही तरीके से करते हैं। लेकिन यदि गलत तरीके से अनुलोम विलोम का अभ्यास किया जाए तो यह शरीर को नुकसान पहुंचा सकता हैं। इसके साथ ही दमा, अस्थमा और श्वास संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह पर ही अनुलोम विलोम का अभ्यास करना चाहिए।

इमेज सोर्स- webdunia.com
अनुलोम विलोम प्राणायाम

अनुलोम विलोम के फायदे (Benefits of Anulom Vilom in hindi) –

  • अनुलोम विलोम का अभ्यास करने से श्वास नली साफ होती है।
  • इसे नियमित रूप से करने से नसों की भी सफाई होती है और वह रोग मुक्त होती है
  • अनुलोम विलोम करने से शरीर में ब्लड सरकुलेशन अच्छा होता है।
  • इसे करने से पेट में गैस की समस्या नहीं होती है
  • गले या फेफड़ों में जमे कफ के लिए भी अनुलोम-विलोम करना फायदेमंद साबित हो सकता है।
  • अनुलोम विलोम करने से फेफड़े मजबूत होते हैं।
  • इसके नियमित अभ्यास से पाचन क्रिया भी सही रहती है।
  • इसे करने से मानसिक तनाव कम हो जाता है क्योंकि इससे ऑक्सीजन का संचार पूरे शरीर में अच्छी तरह से होता है।
  • माइग्रेन की समस्या में भी अनुलोम-विलोम करना अच्छा होता है।
  • अनुलोम विलोम करने से कंसंट्रेशन बढ़ता है।

अनुलोम विलोम के नुकसान (Side effects of Anulom Vilom in hindi) –

  • गलत तरीके से अनुलोम विलोम करने से शरीर को नुकसान पहुंच सकता है
  • गंभीर श्वास सबंधी बीमारियों में अनुलोम विलोम करने से बचना चाहिए।

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अनुलोम विलोम से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल –

अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से कौन से रोगों से मुक्ति मिलती है?

अनुलोम विलोम करने से ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, डिप्रेशन और श्वास संबंधित रोगों से मुक्ति मिल सकती है।

अनुलोम विलोम कब नहीं करना चाहिए?

पेट भरा होने के बाद अनुलोम विलोम नहीं करना चाहिए या फिर चाय या कॉफी का सेवन करने के बाद अनुलोम विलोम का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

खाना खाने के कितनी देर बाद अनुलोम-विलोम करना चाहिए?

खाना खाने के 3 घंटे बाद व खाना खाने से 1 घंटे पहले अनुलोम विलोम कर सकते हैं।

ज़रूरी सूचना – इस लेख में सारी जानकारी तथ्यों के आधार पर दी गयी है, अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श ले। यह पेज इस जानकारी के लिए किसी भी ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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